1. भोजन की महत्ता और इसके कार्य (Importance of Food and Its Functions)
2. भोजन के तत्व-कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा (Food Constituents- Carbohydrates, Protein and Fats)
3. भोजन पकाने की विधियां (Methods of Cooking)
4. भोजन के तत्व-विटामिन और खनिज लवण (Food Constituents-Vitamins and Minerals)
5. आहार परिरक्षण (Food Preservation)
6. भोजन में मिलावट (Food Adulteration)
7. संतुलित आहार की धारणा (Concept of Balanced Diet)
8. भोजन का वर्गीकरण (Classification of Food)
9. आहार आयोजन (Meal Planning)
10. चिकित्सीय आहार और सामान्य आहार का रूपांतरण (Therapeutic Diets And Modification of Normal Diets)
11. विभिन्न रोगों के अन्तर्गत चिकित्सीय आहार (Therapeutic Diets For Different Diseases)
12. शरीर की ऊर्जा आवश्यकता (Energy Requirement of the Body)
13. बाल विकास की परिभाषा और महत्व (Definition and Importance of Child Development)
14. वृद्धि और विकास में अन्तर और विकास के सिद्धांत (Difference Between Growth and Development and Principles of Development)
15. बच्चों का शारीरिक विकास (Physical Development of the Children)
16. क्रियात्मक विकास (Motor Development)
17. संवेगात्मक विकास (Emotional Development)
18. भाषा विकास (Language Developmet)
19. सामाजिक विकास (Social Developmet)
20. खेल (Play)
21. व्यवहार के विकार (Behaviour Problems)
22. गर्भावस्था (Pregnancy)
23. पूर्व प्रसव विकास (Pre-Natal Developmet)
24. शिशु आहार (Feeding of the Infant)
25. प्रयोगों सम्बन्धी साधारण निर्देश (General instructions for Practical)
26. आहार आयोजन (Planning of Diet)
27. (Refer to Soft and Liquid Diet Given In Chepter 10 of Paper A.)
28. गर्म और ठंडे पेय पदार्थ (Hot and Cold Beverages)
29. आहार संरक्षण (Food Preservation)
30. कम कैलोरी के व्यंजन (Low Calorie Recipes)
31. कम कीमत वाले व्यंजन (Low Cost Recipes)
32. खाद्य पदार्थ का पौष्टिक मान बढ़ाना (Enhancing Nutritive Value of Food)

पोषण संबंधी बीमारियाँ भी देश की एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है । ये बीमारियों आहार में किसी पोषक तत्व (Nutrient) की कमी या अधिकता की वजह से उत्पन्न होती हैं । देश की जनसंख्या का बहुत छोटा भाग ही संतलित आहार (Balanced diet) का सेवन करता है | निम्न आय वर्गीय परिवार एक ओर जहाँ कुपोषण (Malnutrition) की समस्या से ग्रसित है, वहीं दूसरी ओर उच्च आयवर्गीय परिवारों द्वारा लिया जाने वाला अतिपोषण (Over nutrition) भी बीमारियों को जन्म देता है ।
व्यक्ति के पूर्ण रूप से स्वस्थ रहने के लिए उसके द्वारा संतुलित आहार (Balanced diet) लिया जाना आवश्यक है । संतुलित आहार ऐसा आहार होता है जिसमें भोजन के सभी अवयव यथा कार्वोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन्स, खनिज लवण एवं जल उचित मात्रा एवं अनुपात में मौजूद होते है। सतुलित आहार का अभाव व्यक्ति में कुपोषण जनित अथवा अतिपोषण जनित बीमारियों उत्पन्न कर देता है। इसके अलावा शिशुओं (Infants), बच्चों (Children), किशोरियों (Adolescent girls). गर्भवती माताओं (Pregnant mothers) एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं (Lactating women) को शरीर की आवश्यकतानसार अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है जिसका अभाव या तो इनके उपयुक्त वृद्धि एवं विकास को बाधित कर देता है या कपोषणजनित बीमारियाँ उत्पन्न कर देता है । हमारे देश में पाई जाने वाली पोषण संबंधी मुख्य समस्याएँ निम्न हैं –

प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण (Protein Energy Malnutrition)

भारत जैसे विकासशील देश में प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण (PEM) एक प्रमुख पोषण समस्या है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है यह समस्या आहार में ऊर्जा एवं प्रोटीन की कमी के कारण उत्पन्न होती है। यह समस्या मुख्य रूप से विद्यालय पूर्व बच्चों (Pre school children) में पाई जाती है । इस उम्र समूह वाले लगभग 12 प्रतिशत बच्चे इस समस्या से ग्रसित है। प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण के मुख्य रूप से निम्न कारण हो सकते हैं

  • शरीर की आवश्यकतानुसार प्रोटीन एवं ऊर्जा पर्याप्त मात्रा में नहीं लेना।
  • कैलोरी युक्त खाद्य पदार्थों का अच्छी गुणवत्ता का नहीं होना।
  • बच्चे में किसी संक्रमण की उपस्थिति
  • क्लिनिकली (Clinically) प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण के तीन मुख्य रूप होते हैं
  • क्वाशिओरकर (Kwashiorkor)
  • मरासमस (Marasmus)
  • मरास्मिक क्वाशिओरकर (Marasmic kwashiorkor)

पोषणीय एनीमिया (Nutritional anaemia)

हमारे देश में एनीमिया भी एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है। यह समस्या छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओ (Pregnant woman) तथा स्तनपान कराने वाली माताओं (Lactating women में तलनात्मक अधिक पाई जाती है। हमारे देश में pregnancy के दौरान लगभग दो तिहाई महिलाएं एनीमिया का शिकार होती है। एनीमिया pregnancy के दौरान होने वाली कुल मातृक मृत्युओं (Maternal deaths) में से लगभग 20 प्रतिशत के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार होता है।

आहार में एक या अधिक पोषक तत्वों की कमी के कारण हीमोग्लोबिन (Hb level) का सामान्य से कम हो जाना पोषणीय एनीमिया (Nutritional anaemia) कहलाता है | सामान्य वयस्क गर्भवती 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चे तथा स्कूल जाने वाले बच्चो का होमाग्लोबिन स्तर क्रमश: 12, 11, 11 तथा 12gram/dl से कम हो जाना एनीमिया (Nutritional anaemia) की उपस्थिति को इंगित करता है।

(iii) गलगण्ड या घेघा (Goitre) –

आहार में आयोडीन (lodine) की कमी से गलगण्ड या घेघा नामक रोग हो जाता है। इस रोग में गले (Throat) में पाई जान वाला थायरॉइड ग्रन्थि (Thyroid gland) का आकार अत्यधिक बढ़ जाता है | सामान्य अवस्था में थायराइड ग्रान्थ का वजन 25 ग्राम होता है जो कि कोशिकाओ के हाइपरप्लेसिया कारण बढ़कर (Due to hyperplasia of cells) 500 ग्राम तक या इससे भी अधिक हो जाता है।भारत में यह बीमारी मुख्य रूप से पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों में पाई जाती है।

(iv) लैथाइरिज्म (Lathyrism) –

लैथाढरिज्म लकवा (Paralysis) उत्पन्न करने वाली बीमारी है जो खेसरी दाल’ के अधिक उपयोग के होती है। इस बीमारा महागा कामासपशिया (Muscles) लकवागस्त (paralvsed) हो जाती है |भारत में यह बीमारी मुख्य रूप स उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार तथा उड़ीसा जैसे राज्यों में पायी जाती है यह बीमारी मुख्य रूप से 15 से 45 साल की उम्र के लोगों में पाई जाती है।

विटामिन्स की कमी से होने वाली बीमारियाँ (Vitamin deficiency diseases)-

इनमें विटामिन-ए (रेटिनॉल) की कमी से होने वाली बीमारियों मुख्य हैं। इनमें शामिल हैं –
• रात्रि अंधता (Night blindness)
• किरेटोमलेसिया (Keratomalacia)
• कॉर्नियल जीरोसिस (Corncal xerosis)
• कंजक्टाइवल जीरोसिस (Conjuctival xcrosis)
• बिटॉट्स स्पॉट (Bitot’s spot)
इसके अलावा आहार में अन्य विटामिन्स की कमी के कारण भी बीमारियाँ उत्पन्न हो सकती हैं, जिनके बारे में निम्न सारणी में बताया गया है |