पर्यावरणीय अस्वच्छता भी हमारे देश की एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या है । पर्यावरण में जल-प्रदूषण (Water-pollution), वायु-प्रदूषण (Air-pollution), ध्वनि-प्रदूषण (Noise-pollution) अथवा मृदा-प्रदूषण (Soil-pollution) की मौजूदगी पर्यावरणीय अस्वच्छता के प्रतीक हैं । ये स्थितियाँ व्यक्ति में अनेक रोग उत्पन्न कर देती हैं । उदाहरण स्वरूप प्रदूषित जल का सेवन दस्त रोग, हैजा, पेचिस, टायफाइड, हिपेटाइटिस-ए, गैस्ट्रोएन्टेराइटिस, अमीबायसिस (Diarrhoea,Cholera, dysentery, typhoid, Hepatitis-A, gastroenteritis, amoebiasis) जैसी बीमारियाँ उत्पन्न कर देता है । इसी प्रकार वायु प्रदूषण की स्थिति विभिन्न श्वसनीय, न्यरोलोजिकल, हृदयी तथा आँखों संबंधी समस्याएँ, गर्भपात (Abortion), समय पूर्व प्रसव (Pretermlabour) नवजात में जन्मजात विकृतिया (Congenietal disorders in neonate) आदि उत्पन्न कर देती है । शोर-प्रदूषण व्यक्ति में बहरापन, चिड़चिड़ापन, सिर-दर्द, नीद का कम आना या नहीं आना, रक्त दाब का बढ़ जाना (Hypertension) जैसी समस्याएं उत्पन्न कर पर्यावरणीय प्रदूषण के लिए निम्न कारक उत्तरदायी हैं –

  • घरों, कार्यालयों एवं उद्योगों से निकले कडा-करकट/अपशिष्ट पदार्थों का अनुपयुक्त तरीके से निस्तारण |
  • मोटर वाहनों एवं कल-कारखानों से निकला धुँआ ।
  • वनों की अंधाधुंध कटाई।
  • कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए उपयोग में लिये जाने वाले उर्वरक एवं कीटनाशक ।
  • लोगों द्वारा खुले में मल-त्याग करना।
  • उच्च जनसंख्या घनत्व।
  • जन-समदाय में पर्यावरणीय स्वच्छता के प्रति जागरूकता का अभाव आदि।