
भारत देश एक विशाल विकासशील देश है किसी भी राष्ट्र के विकास में स्वास्थ, शिक्षा, सुरक्षा, रोजगार आदि जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उन्नति करना एवंम बेहतर सेवाये प्रदान करना ही प्रमुख कार्य होता है किन्तु हमारे देश में भी चिकित्सा विज्ञानं के क्षेत्र में हो रहे नये-नये अनुसंधान (Research) के द्वारा बीमारियों का निदान (Diagnosis of diseases) उपचार (Treatment) तथा रोकथाम (Prevention) पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली एव आसान तरीके से संभव हो पाया है आज बीमारियों के निदान एवं उपचार हेतु बेहतर तकनीकों का उपयोग किया जाने लगा है किन्तु हमारे देश में –राष्ट्रीय स्वास्थ्य समस्या (NATIONAL HEALTH PROBLEMS) के रूप में (I) संचारी रोग (II) गैर संचारी रोग (III) पोषण सम्बन्धी समस्या (IV) चिकित्सा देखभाल समस्या (V) पर्यावरण प्रदूषण की समस्या (VI) जनसंख्या विस्फोट समस्या प्रंमुख स्वास्थ समस्या बनी हुई है जिनके लिए अनेक कारण उत्तरदायी है जिसमे जन-समुदाय को प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य देखभाल का असमान बँटवारा (Unequal distribution) होना देशवासियों के स्वास्थ्य स्तर के कमजोर होने का एक प्रमुख कारण है। भारत गाँवों का देश है तथा यहाँ की लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या गाँवों में तथा 20 प्रतिशत जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में निवास करती है। इसके विपरीत केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का लगभग 80 प्रतिशत भाग शहरी क्षेत्रों तक सीमित है। इनका केवल 20 प्रतिशत हिस्सा ही ग्रामीण तथा दूरवर्ती क्षेत्रों में निवास कर रहे लोगों तक पहुँच पाता है। इसका परिणाम यह निकलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों (Rural areas) में निवास कर रहे लोग इन स्वास्थ्य सेवाओं से लाभान्वित नहीं हो पा रहे हैं। इस प्रकार स्पष्ट है की आज भी स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्याओं ने हमे जकड़ा हुआ है जो कि हमारे देश को विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में शामिल होने में एक बड़ी बाधा बनी हुई हैंl
जन-समुदाय को प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य देखभाल का असमान बँटवारा होना देशवासियों के स्वास्थ्य स्तर के कमजोर होने का एक प्रमुख कारण है | इसका परिणाम यह निकलता है कि ग्रामीण क्षेत्रो में निवास कर रहे लोग इन स्वास्थ्य सेवाओं से लाभान्वित नहीं हो पा रहे हैं। कई क्षेत्रों में ग्रामीण लोग आज भी रोगों के उपचार हेतु देशी नीम-हकीमों या दैवीय शक्तियों का सहारा लेते हैं। इसके अलावा हमारे देश में रोगों के निदान एवं उपचार हेतु उपयोग में ली जाने वाली पद्धतियाँ मुख्य रूप से अंग्रेजी चिकित्सा पर आधारित है जो कि तुलनात्मक बहुत मंहगी है। निम्न आयवर्गीय परिवारों द्वारा इसका खर्च उठा पाना थोड़ा मुश्किल है। स्वास्थ्य केन्द्रों एवं अस्पतालों में चिकित्सकों,नर्सिंग स्टाफ, ए.एन.एम. पैरामेडीकल स्टाँफ आदि की संख्या भी उपचार हेतु आने वाले रोगियों की संख्या के अनुपात में नहीं है जो कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के क्रियान्वयन में बड़ी बाधा है। इस प्रकार स्पष्ट है कि आज भी स्वास्थ्य संबधी अनेक समस्याओं ने हमे जकड़ा हुआ है जो कि हमारे देश के विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में शामिल होने में एक बड़ी बाधा बनी हुई है। इण्डियन रुरल टेलीमेडिसिन सेवा संस्थान टेलीमेडिसिन (दूर चिकित्सा) के माध्यम से पंजिकृत (MCI) चिकित्सक द्वारा हेल्थ वर्कर (G.N.M., A.N.M.,Allied Health) के सहयोग से टेलीमेडिसिन E-क्लीनिक के माध्यम से भारत के ग्रामीण एंव दुर्गम क्षेत्रों में निवास कर रहे जरुरतमंद आम लोगों का इलाज कराने हेतु कार्य कर रही है। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर सही इलाज के अभाव में होने वाली आकस्मिक मृत्यु दर ,शारीरिक तकलीफो एंव क्षतियों को कम करते हुए अस्पतालों में होने वाली भीड़ को कम किया जा सकें एंव बच्चों, वृद्ध व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं, को परिवहन के कारण होने वाली असुविधा से बचाया जा सकें।